दो पल

दो पल
उनके आसुओ की एक कहानी नई थी,उनकी आँखों की पहचान नई थी
जिन्दगी तो बस ऐसे ही गुजर रही होती , पर समय की मांग नई थी
हमने उन लम्हों को भुलाना चाहा, नजारों को दूर भगाना चाहा
तक़दीर का मुख मोरना चाहा, पर दिल ने हम हर बार मनना चाहा//

उन यादो को आंसु क्यों बनाये , जो कल तक हमारे न थे
उन लम्हों को दुबारा क्यों बुलायें, जो किसी और के थे
उन निगाहों की चमक को क्यों चमकाये, जो किसी और के लिए बेकरार थे
मै उन उमीदो मै जीने वाला इन्सान नही , जो किसी दुसरे की आजमाईश थी//

दो पल की इस कहानी को याद लिए हम , जीने की राह खोजते हम
समय की मांग ढूंडते हम ,बस एक ही प्रयास करते हम
एक ही फरियाद करते हम , लौटा दो हमारे वो दो पल
जिनके लिए हर रोज , खुद को मानते हम………..

अमन झा |||

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