घर

इस घर में
झांककर
देखो जरा
यहाँ
बारिश आती है
भिगोने खुद को
धूप सेंकती है
अपना बदन
नींद हर रोज़
करती है
जागरण
और भूख
ठहर गयी है
तृप्त भाव से
हमेशा के लिए
आखिर
इस घर में
और कोई नहीं
रहता है
एक मजदूर
अपने परिवार
के साथ

रचना शर्मा

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