नए वर्ष का प्रारभं

2014 वर्ष अपनी यात्रा के अंतिम पड़ावव की तरफ बढ़ रहा है |
2015 का प्रभात सूर्य शिशु धीरे-धीरे अपनी यात्रा शुरु करने की शुरुआत कर रहा है |
2014 में नित अच्छे और बुरे परिवर्तन हुए है |
परिवर्तन मानव को सबक और समझ का बल देते है |
एक चाय वाला भारत का प्रधानमंत्री बना है , यह भी एक परिवर्तन है |
इंसानियत के दुश्मनों ने नन्हे मासूमो का खून किया, यह इंसानियत के लिए एक धक्का है |
धर्म और आस्था के दुश्मन धर्म का मजाक बना , कर रहे तमाशा यह भी एक बुरा परिवर्तन है |
हर रोज एक माँ को देखता कि वह अपने परिवार के अस्तित्व के लिए मेंहनत करती है |
उस स्त्री की अथक मेंहनत मेरे इरादों को मजबूत और बलबान बनती है |
2015 में नित नए परिवर्तन होगे |

वे परिवर्तन सभी के लिए अच्छे होगे , ऐसी मेरी आशा और अभिलाषा है |

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