आतंकवाद का वीभत्स रूप

धर्म, मजहबी और सियासत के नाम पर इन्सान खेल रहा
मासूमो के खून के साथ खेल रहा होली है |
इस दुनिया के ताकतवर देश कर रहे हथियारों की बिक्री है और
इंसानियत के दुश्मन उन ही हथियारों से खेल रहे मासूमो के खून से होली है |
मासूमो के घरो में पसरा सन्नाटा है, मातम की चीखे गूंज रही उन घरो में और जहां कभी हँसी गूंजती थी |
हँसी अब मातम में बदल चुकी है और चारो तरफ पसरा सन्नाटा है|
चारो तरफ पसरा सन्नाटा चीख –चीख कर दे रहा इंसानियत के दुश्मनो के दुष्कर्त्य की गबाही है |

हे रहवर|! दुनिया में आकर फिर से इन घरो की हँसी लौटाओ|

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