ख्वाबों के टुकड़े

रोज देखती हूँ उसे
बटोरते हुए
ख्वाबों के टूटे टुकड़े
फिर उन्हें
सहेज कर रखते हुए
उम्मीद के पिटारे में
इंतज़ार है मुझे
उस पल का
जब ख्वाब
पिटारे में बंद नहीं होंगे
हकीकत बनकर
उसकी आँखों से
बहेंगे …
खुशियों के
आंसू बनकर …..

Rachana Sharma

6 Comments

  1. vaibhavk dubey वैभव दुबे 10/04/2015
  2. Rachana sharma rachana 13/04/2015
  3. DR. GANGADHAR DHOKE 02/05/2015
    • Rachana sharma rachana 04/05/2015
  4. C.M. Sharma babucm 26/04/2016
    • Rachana sharma Rachana sharma 26/04/2016

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