अंजुरी भर धूप

धूप ..
क्यों न तुझे भर लूं
अंजुरी में
और बिखेर आऊँ
उस तंग गली की
सीलन भरी कोठरी में
जहाँ बूढी आँखे
झांक रही हैं
फटे कम्बल से
इस इंतज़ार में
कि उनका जाया
कोई आएगा
जो दीपक में
सूख चुकी बाती को
जलाकर ,उन्हें ..
रोशनी दिखायेगा

4 Comments

  1. vaibhavk dubey वैभव दुबे 10/04/2015
  2. DR. GANGADHAR DHOKE 02/05/2015
  3. C.M. Sharma babucm 26/04/2016
    • Rachana sharma Rachana sharma 26/04/2016

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