ख़ूबसूरती,,,,,,

ऐ बूत-ए-संगमरमर माना मूझसे तेरी खुबसुरती लाख हैं
पर बात होती है जिस जगह दिल और ज़ज्बात की वहाँ तेरी क्या औक़ात हैं
\\\\\विकास/////