साथ


    1. अगर बचपन में पापा ने थामा हाथ न होता
      न गिर के संभालता न कभी खड़ा हो पाता
      जिंदगी में न मिलता साथ मुझे मेरे अपनों का
      फिर भला मेरा वजूद इस दुनिया में कहाँ होता !!

      लोग यूँ ही करते है बदनाम अपनों को जमाने में
      अपनों के दिए दर्द में भी उनका प्यार छुपा होता
      कैसे करते हम अहसास परायेपन का दुनिया में
      अगर जिंदगी में अपनों का मिला साथ न होता !!

      कैसे उड़ पाते परिंदे अगर खुला आसमा मिला न होता
      कैसे बहती नदिया झुमके जो किनारो का साथ न होता
      कहाँ लहलाते पेड़ पौधे अगर धरती का आँचल न होता
      कहाँ संभव था जीवन गर वायु का मिला साथ न होता !!

      न सीख पाता कभी प्यार की परिभाषा
      अगर माँ का पाया मैंने दुलार न होता
      कौन सिखाता मुझे खेल दुनियादारी के
      अगर पिता ने दिया सहारा न होता !!

      कब जान पाता एक हाथ का दूसरे से रिश्ता
      अगर भाईबन्धु संग जीवन बिताया न होता
      न जान पाता कभी निश्छल प्रेम का मतलब
      अगर बहन का प्यार जीवन में पाया न होता !!

      कैसे उठाता लुफ्त अपने जीवन का
      अगर सखा किसी को बनाया न होता
      किस संग कटते अपने दुःखसुख के पल
      अगर जीवन साथी कोई बनाया न होता !!

      न होता उदय कभी न शाम ढलती
      ये रात-दिन का चला खेल न होता
      ये बादल, बिजली वर्षा, ये धूप छाव
      ना ये जमी होती न ये आसमा होता
      अगर सबको एक दूजे का मिला साथ न होता !
      अगर सबको एक दूजे का मिला साथ न होता !!

      डी. के. निवातियाँ ________!!!

6 Comments

  1. vaibhavk dubey वैभव दुबे 09/04/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/06/2015
  2. बन्टी "विकास" माहुरे बन्टी "विकास" माहुरे 10/04/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/06/2015
  3. rakesh kumar rakesh kumar 10/04/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/06/2015

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