मैं खुश हूँ…

मैं खुश हूँ की तुझसे कोई वास्ता तो है,
मेरे दिल में तेरी याद का एक रास्ता तो है।

वो घर में ही रहता है पर एक तसल्ली है,
आहट कोई सुनता है तो झांकता तो है।

जीतकर बैठा है वो तमाम दिल-ए-आवाम,
इक दिल-ए-सुकून है मुझसे हारता तो है।

इतना भी बुरा वक़्त अभी आया नहीं ‘आलेख’,
हर शख़्स चैन-ओ-अमन यहां चाहता तो है।

— अमिताभ ‘आलेख’

3 Comments

  1. vaibhavk dubey वैभव दुबे 08/04/2015
    • आमिताभ 'आलेख' आमिताभ 08/04/2015
  2. upendra kumar 10/04/2015

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