दर्द तुमको भी हुआ होगा तो जरूर!!

कल रात अपने आँगन के पीपल से दो आंसू तोड़ डाले मैंने,
दर्द तुमको भी हुआ होगा तो जरूर!!
मेरी खुशीओं कि राख से तुम्हारी आँखों में काजल सजाया था जब,
दर्द तुमको भी हुआ होगा तो जरूर!!
आखिरी मुलाकात पे जलती होली की तरह कलेजा जला था धूं धूं,
दर्द तुमको भी हुआ होगा तो जरूर!!
जब तुम्हारी डोली के कहार मेरे बिखरे टुकड़ों को लाँघ के निकले थे,
दर्द तुमको भी हुआ होगा तो जरूर!!
खुद की लाश का कफ़न रंग, तुम्हे लाल चुनरी उङायी थी मैंने,
दर्द तुमको भी हुआ होगा तो जरूर!!
अपनी चिता कि लकड़ियाँ अपने आँसुओं से भीगा डाली थी मैंने जब,
दर्द तुमको भी हुआ होगा तो जरूर!!

Anupam S Shlok

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