ग़ज़ल ll ” सनम तुम बिन नहीं जीना”

सनम तुम बिन नहीं जीना, तेरी यादों में मर जाना l
सजा चाहो जो तुम दे दो, मगर दिल से ना ठुकराना ll

ये माना हूँ नहीं मैं आपके काबिल सनम,
मगर आती है हमको भी निभानी हर कसम,
सनम इक बार ही दे दो, हमें चाहत का नज़राना l
सजा चाहो जो तुम दे दो, मगर दिल से ना ठुकराना ll

जो आंसू बन के बहते है, वो सरे गम हमें दे दो,
वो काँटों से भरी राहें, तुम्हे मेरी कसम दे दो,
बदलता है ज़माना पर कभी तुम ना बदल जाना l
सजा चाहो जो तुम दे दो, मगर दिल से ना ठुकराना ll

बिखरता जा रहा हूँ , इक सहारे की ज़रुरत है,
ये कह दो आज के तुमको सनम हमसे मोहब्बत है,
सनम अच्छा नहीं अपनी मोहब्बत में यूँ तड़पाना l
सजा चाहो जो तुम दे दो, मगर दिल से न ठुकराना ll

सनम तुम बिन नहीं जीना, तेरी यादों में मर जाना l
सजा चाहो जो तुम दे दो, मगर दिल से ना ठुकराना ll

(राहुल सिंह)

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