जनवाद

मिशनरियों के होर लगे हैं
मानवता के डोर टूटे हैं
सभी अपने कौम को बढ़ाने में
मानवता को भूल चुके हैं
कौम के रहनुमाओं तुम संभल जाओ
सबसे ऊपर मानवता है, यह बतलाओ
इतिहास गवाह है जान लो तुम
अभी वक़्त है औकाद में आ जाओ तुम
अब तानाशाही चलेगी नहीं
लहू मानवता का बहेगा नहीं
दाल सम्प्रदायिकता का गलेगा नहीं
अभी वक़्त है होस में आ जाओ तुम
जनता जाग चुकी है जान लो तुम
मानवता का नाम कभी मिट नहीं सकता
अरे हैवानियत कभी जीत नहीं सकता
अभी वक़्त है संभल जाओ
मानवता को धर्म बनाओ
जनवाद से जीवन आवाद है
वरना किया कहूँ यारों सब बर्बाद है
यही इन्सानियत का धर्म है बंधू
यह सवाल नहीं, कौन मुस्लिम कौन हिन्दू?
सभी धर्मों में मानवता को पूजे गए हैं
फिर भी मिशनरियों के होर हैं।

One Response

  1. vaibhavk dubey वैभव दुबे 19/03/2015

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