”शिकायत करता हु खुदा से”

”रक्त रंजीत हाथो से ,बिखरी हुई सांसो से
शिकायत करता हु खुदा से
बनाया क्यों तूने ,अलग अलग इंसानो को
एक दिल में प्यार रखता है
तो दूजा मिटाने को तैयार रहता है,
घृणा होती है तेरे इस जहाँ से
और तू सब्र बनाये रखने को कहता है,
हमने कहा खुदा से ,
दो अलग अलग इंसानो को
बनादे नयी दुनिया कहिपे
तो खुदा ने मुस्कुराके कहा मुझसे
की ऐ फरियादी गौर से सुन जरा
बनाया था एक ही मैंने तुम्हे
दिए थे एक जैसे ही आकार सबको,
एक ही आकाश और पानी की धरा भी एक ही दी
एक ही धरती और एक ही हवा दी
तुम्हारी रगों में बंहता खून
और दिलो में धड़कती हुयी सांसे भी एक दी
फिर भी शिकायत मुझसे ही करते हो
खुद से क्यों नहीं शिकायत तुमको
क्यों बाँधा खुद को तुमने धर्मो में
खुद को क्यों बाँटा मंदिर और मस्जिदों में
शिकायतों से बदलता नहीं दिल कभी
खुद को बदलने से बदलती है दुनिया
तभी अफ़सोस हुआ खुद पे मुझको
करता हु क्षमा याचना मै तुमसे
कुछ क्षण को भूल गया था मै तुमको
पर अब भूल न होगी फिरसे
चलेंगे तुम्हारे बताये रस्ते पे
बनाएंगे हंसी और भी तुम्हारे इस जहाँ को फिर से”

2 Comments

  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 18/03/2015

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