जन्मदिन मुबारक हो-“ऐ निकिता”

दिन ये खास, है आम सा लगता
जीवन में सभी के, खुदा दिन ये लिखता ।
जन्म दिवस एक ऐसा दिन, जीवन में भरता अथाह प्रकाश
कुछ के दिन पहले से होते खास, कुछ अंदाज़-ए-बयाँ से करते खास ।
एक वो दिन जब धरती पर आये, दूजा जब तू ये समझे
ऐसे ही जीना, नही है जीना, कुछ अलग तो होगा भी तुझमें ।

बस तू ये समझ, और दिखला दे, अपनी इठलाती अदाओं से
गर जानना चाहे, कि तू क्या है, तो पूछ ले इन फिज़ाओं से ।
हर हरकत से ये बतला देंगे, तू क्या अहमियत रखती है
सुंदरता देखन को तू जग, आँखें मेरी तुझे ही तँकती है ।
तू जशन मना, बाँट खुशियाँ, ले ले दुनिया की खूब बधाई
जो सुन तू सके धड़कन को मेरी, तो सुन मेरी जशन-ए-तनहाई ।

मिलने को शायद तू ना आये, पर, तूझ बिन, तूझ संग हूँ मैं जीता
अपनी तू कहे, कभी मेरी सुन, तूझ बिन ये जीवन अबतक, कैसे बीता ।
देने को तोहफ़ा जो मैं पाऊं, हँसी को तेरी, पलङे साँसें मैं हूँ रखता
हर कतरा भी केहता है फिरे, जन्मदिन मुबारक हो, ” ऐ निकिता ऐ निकिता ” ।।
By Roshan Soni

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