”स्वागत है तुम्हारा इस खूबसूरत दुनिया में”

ये कविता मेरी आने वाली बेटे के लिए लिख रहा हु.
”स्वागत है तुम्हारा
इस खूबसूरत दुनिया में
मनुष्यो के इस हसीं जहाँ को
भेजा है किसीने और भी खूबसूरत बनाने को
न उसे मै जानता हु और न ये जहाँ जानता है
और जानके भी कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे
जिंदगी मिली है ये छोटी सी
पर है बहुत बड़ी ये दुनिया
हमें सोचने को,समझने को और महसूस करने को
वक़्त है नहीं तुम्हारे पास बर्बाद करने को
कुछ भी कर सकते हो,कुछ भी बन सकते हो तुम
और इस दुनिया को बदल भी सकते हो
है खुदा ने वो ताक़त दिया तुमको
ना जीना तू औरो की तरह
तू कुछ नयी सोच रखना ,
और कुछ नया करने की कोशिश करना
कभी किसी काम को लेकर दुविधा आये तो,
रुकना मत उसे अंजाम तक ले जाना
सफल हुए तो ठीक,
मगर असफल होने पे कुछ नया मिलेगा सीखने को
कुछ नहीं तो एक नया तजुर्बा मिलेगा तुमको
जो बहुत कीमती होगा
तजुर्बे रखना हर चीज की
मगर किसीको अपनी आदत मत बनाना
तजुर्बे तुम्हे सही और गलत का फर्क करना सिखाएंगे
गलतिया करना ,मगर गलतियां स्वीकारने से डरना मत
क्योंकि गलतिया वही करते है,
जिन्हे कुछ करने की चाह होती है
खुद की गलतियों को स्वीकार करना
और दुसरो की गलतियों को माफ़ करना
ताकि मौके मिले सभी को ,गलतिया सुधारने की
जान बुझके ना गलतिया होती किसीसे
और ना करता है बुरा बर्ताव कोई
प्यार करना सबको उतना
जितना करते हो खुद को,
सम्मान करना सब का और सब पे भरोसा करना
मगर भरोसे में किसी के अंधे मत होना
खुल के हंसो ,जिओ,खाओ और जोरो से रोओ
बचपन को मिटने मत देना
और मन को बूढ़ा भी मत होने देना
चिंतन करना भविष्य की पर चिंता मत करना
याद करना बीते लम्हों को पर उनमे खो मत जाना कभी
होंगे अच्छे और बुरे दिन जिंदगी में
अच्छे दिनों में घमंड ना करना
और ना हताश होना बुरे दिनों को लेके
ना देना सारा श्रेय सफलता का खुदी को
और असफलताओ को किसी पे थोपना भी मत
कोशिश करना इस दुनिया को ,
और भी खूबसूरत बनाने को,
स्वागत है तुम्हारा …..”

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