वो सुबह कभी तो आयेगी

वो सुबह कभी तो आयेगी।
धनिया धनवन्ती जी बनकर
झाड़ू पोंछा बर्तन तजकर
बन कर सुशिक्षिता गाँवों में
अपना उद्योग चलायेगी।
वो सुबह कभी तो आयेगी।

कोई न किसी का चर होगा
मजदूर कृषक साक्षर होगा
जब रधिया कोरे कागज पर
अंगूठा नहीं लगायेगी ।
वो सुबह कभी तो आयेगी।

जब तजकर यह बंदूक राज
आतंकहीन होगा समाज
कोई गोली आकर गांधी का
सीना चीर न पायेगी ।
वो सुबह कभी तो आयेगी।

फिर मिल कर ईद मनाएंगे
होली के रंग जमायेंगे
जब मंदिर की बाहें मस्जिद को
हँसकर गले लगायेगी ।
वो सुबह कभी तो आयेगी।

सर्वत्र सहज शान्ति होगी
ना आन्दोलन क्रांति होगी
मिट जाएंगे सब भेदभाव
धरती ही स्वर्ग कहायेगी।
वो सुबह कभी तो आयेगी।
वो सुबह कभी तो आयेगी।

One Response

  1. Ashok Kumar Gupta 16/03/2015

Leave a Reply