वक़्त-ऐ-क्रांति

उठ चलो ऐ दोस्त मेरे क्रांति का वक़्त आया है,
तोड़ दो सारी मूक बंदिशें क्रांति का वक़्त आया है,
शिक्षा, चिकित्सा व रोजगार पर आघात पहुंचाने वाले
इन खदियों को ऐ दोस्त मेरे
अब धरा की गंदी धूल चटाने का वक़्त आया है.

उठ चलो ऐ दोस्त मेरे क्रांति का वक़्त आया है,
तोड़ दो सारे धर्मो की बंदिशे क्रांति का वक़्त आया है,
धर्मों के नाम पर लड़ाने वाले
इन खदियों को ऐ दोस्त मेरे
अब धरा की गन्दी धूल चटाने का वक़्त आया है.

उठ चलो ऐ दोस्त मेरे क्रांति का वक़्त आया है,
तोड़ दो सारे भाषाओं की बंदिशें क्रांति का वक़्त आया है,
भाषाओँ के नाम पर मानवता को घात पहुंचाने वाले
इन खदियों को ऐ दोस्त मेरे
अब धरा की गंदी धूल चटाने का वक़्त आया है.

उठ चलो ऐ दोस्त मेरे क्रांति का वक़्त आया है,
तोड़ दो सारे क्षेत्रों की बंदिशें क्रांति का वक़्त आया है,
क्षेत्रों के नाम पर कोलाहल मचाने वाले
इन खदियों को ऐ दोस्त मेरे
अब धरा की गंदी धूल चटाने का वक़्त आया है.

One Response

  1. vaibhavk dubey vaibhavk dubey 16/03/2015

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