“””””सियासी खेल- जातिवाद”””””

“””””सियासी खेल- जातिवाद”””””

भारत के सियासी खेल में , मोहरे हैं बने हम सब
शतरंज में मोहरे स्याह -शवेत, सियासत में खेल जाति का ग़ज़ब |
लड़वा-भीड़वा ये शोक जताए, अपने मत का वो बैंक बनाये
आरक्षण का जब फेके पासा, जातन के नाम पर विकास की भाषा |
दे के भड़काऊ भाषण, पंहुचा के सभी को ठेस
साधु बन रावण, सीता जी हरे, इनका भी है, कुछ ऐसा ही भेष |
लाभ की बातें करे हमारी, सोचे सिर्फ अपने आप के
इनकी पहचान है बहोत सरल, ये होते ना अपने बाप के |

जिस दिन हम जातिवाद को भूल, मिला लेते हैं अपने सीने
देखो कैसे इन सत्ता के सूदखोरों के, छूट जाते हैं पसीने |
राम जनम और मंदिर -मस्जिद, इनके खेलों के पात्र बने
होते ना खुश हैं ये तबतक, जबतक ना लड़ के कोई मरे |
सरहद की शहदाद को ये पापी, नकली मुठभेड़ जो कहते है
ले जा के इन्हे सियाचिन दिखाओ, कैसे वे हिमालय से अड़ते हैं |
ले जाओ इन्हे तपते रण में, दो घूंट नीर भी परचम है
बस शोक जताते ये कह के, पड़ोसी की हरकत निर्मम हैं |

अपने तख्ते की खातिर, बाँट दिया है देश -ग्राम
बाँट दिया है राम -रहीम, अलग कर दिया मंत्र -कुरान |
बना दिया है लीग कहीं, तो कहीं बनाया संघ
ठेकेदार बने हैं जीवन पथ के, जिन्हे खुद ना जाने जीने का ढंग |
होगा तू चाहे कितना भी चतुर, भभकी तेरी ना डरते हैं
सत्ता जो कमानी दी तेरे, हम उठा फेंक भी सकते हैं |
जो की तूने अब कोई हरकत, गया जो बंटवारे का गान
बनने का देंगे ऐसे मंदिर -मस्जिद ,सजे हो जिससे पहले शमशान और कब्रिस्तान |

भारत के सियासी खेल में , मोहरे हैं बने हम सब
शतरंज में मोहरे स्याह -शवेत, सियासत में खेल जाति का ग़ज़ब |
By Roshan Soni

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