बेटी हूँ तो मिटा दिया |

क्या थी मेरी गलती माँ,
जो तूने मुझे मिटा दिया,
अपनी ही हांथो से तूने,
आँचल अपना हटा दिया,

देख न पायी मैं तेरी सूरत ,
कैसी थी माँ तेरी मूरत,
चली गई मैं यहाँ से रोवत,
कैसी थी माँ पापा की सूरत |

बेटी हूँ मैं इसी लिए क्या ,
हाथ अपना हटा लिया ?
क्या थी मेरी गलती माँ,
जो तूने मुझे मिटा दिया ?

यह दुनिया देखने से पहले,
क्यो तूने मुझे सुला दिया,
क्या थी मेरी गलती माँ,
जो इतना बड़ा सजा दिया ?

” बेटी है तो क्या हुआ,ये है आँखों का नूर |
जीने का अद्दिकार छीन कर करो न इनको दूर | ”

संदीप कुमार सिंह |
(हिंदी विभाग, तेज़पुर विश्वविधयालय )
मो.नॉ. +९१८४७१९१०६४०

6 Comments

  1. संदीप कुमार सिंह SANDEEP KUMAR SINGH 14/03/2015
    • rakesh kumar rakesh kumar 17/03/2015
      • संदीप कुमार सिंह sandeep kr singh 17/03/2015
  2. Ghar Ka Vaidya 17/03/2015
  3. संदीप कुमार सिंह sandeep kr singh 18/03/2015
  4. sandeep 10/04/2015

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