तलाश

जिंदगी की तलाश में,
गुज़रते हैं दिन मेरे।
तलाश है कि पूरी होती नहीं।
समय सीमा समाप्त होती नहीं।
ह्रदय की वेदना कम होती नहीं।

कब ज्ञान होगा जीवन के मूलाधार का!
कब उस परम ब्रह्म की प्राप्ति होगी!
इसी सोच में चल रहा है जीवन।
कभी तो दिवा स्वप्न से निकलकर,
परम सत्य की प्राप्ति होगी।

ना जाने ये तलाश कब पूरी होगी!
कब नए जीवन की शुरुवात होगी!
कब होगा जीवन में अंधकार का खात्मा!
कब खुशियों भरी सुनहरी सुबह होगी!

—निशान्त पन्त ‘निशु’

One Response

Leave a Reply