ग़ज़ल

    1. रख जरा हौसला के सूरज अभी ढला नहीं
      सब्र कर ठहर अभी जरा शाम तो होने दो !!

      न कर जल्दी मै खुद लौट जाऊंगा वापस
      पहले मुझे मेरी राह में नाकाम तो होने दो !!

      बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना
      दुनिया में कोई अच्छा काम तो करने दो !!

      जरुरत पड़ी तो मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम
      जमाने में मेरा पहले मेरा नाम तो होने दो !!

      इसी को कहते है “धर्म ” शायद दुनियादरी
      जिन्दा रहने का कोई बहाना तो मिलने दो !!

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      डी. के निवतियाँ _____!!

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