होली पर कविता

रंग दी तुमने मेरी चुनरिया
भीग गई मेरी चोली
तुम हो कितने निष्ठुर कान्हा
राधा माधव से बोली |
प्रीत रंग में रंग जाने का
नाम है राधा होली
अंग –अंग पर रंग बरसाने
आती है प्यारी होली |
प्रीत रंग से रंगने वाले को
मैं क्यों निष्ठुर बोली
समझ गई मैं कितना पावन
है त्यौहार ये होली |
अलग –अलग रंगों के फूल चमन मैं
जब खेलते हैं सौहार्द प्रेम की होली
तब सजती है सकल बिश्व में
मानवता की रंगोली |
मेरे प्रिय कान्हा मिलकर
खेलें हम भी ऐसी होली
प्यार प्रेम के रंग से भर जाये
सबके मन के रंगों की ये झोली ||
ओम प्रकाश चमोला
omprakashchamola@gmail.com