पछतावा कर रही यू पी की जनता अपनी करनी पर आज

”पछतावा कर रही यू पी की जनता
अपनी करनी पर आज
ग्लानि हो रही खुद के निर्णय से
हो रहा है दम्भ चकनाचूर,
बिखर गया उम्मीदों का मंजर
टूट गए सपने सारे
फरियाद की आस लगाए बैठी
आँखे हो जाती है धुंधली
सत्ता के लोलुपो को उनकी उम्मीद ना आती रास
पछतावा कर रही यू पी की जनता
अपनी करनी पैर आज….
पहचान सकी ना उसकी आँखे
छल,दम्भ,द्वेष के वेष में आये
ठेकेदारो को
हो गयी बहुत बड़ी गलती
जो मतदान किये हमने इनको
चरम विकास की आशा की उस बेली पे
अब तक ना एक भी फूल लगे
भय,आतंक का पनपता साम्राज्य
पनाह का आँचल ओढ़ा रही है
जिसको सपा सरकार आज
पछतावा कर रही ……
उम्मीदों का एक चिराग दिखा
गुजरती बनारसी बाबू में
देख उसकी सज्जनता को
लूटा दिया सब प्यार जिसपे
राहत की एक सांस मिली
जब देखा गंगा आरती करते
दूर हुआ संशय हिन्दू अत्याचार का
हे जनमानस के सेवक तुम्हे
करता हु कोटि -कोटि नमन आज
पछतावा कर रही……
बहुत हो गया नरसंहार
अब तो कुछ पल जीने दो
ईर्ष्या ,द्वेष का घूंट त्यागकर
प्रेम का प्याला पिने दो |”