“”बलात्कारी- कोई कर्म से, कोई सोच से””

“”बलात्कारी- कोई कर्म से, कोई सोच से””

कोई कर्मो से है लज्जित करता,कितनों की सोच गई मारी |
करने वाला है जितना निर्लज,भद्दे सांत्वना दिखाने वाला भी है बलात्कारी ||

सुन ले ऐ तू बलात्कारी,तू न कर ऐसे पुरुषार्थ की सवारी |
तू क्या सोचे हम डर जाएँ, कायरता भरी इस हरकत से |
ये भ्रम है तुझे तू बच लेगा, चुप रहने के अब दिन वो गए|
क्यों दूजे की बहन-बेटी, तुझको चारे सी लगती है ?
शायद तू कभी समझा ही नही, होता जो पुरुष- करता क्या ऐसा कभी ?

तेरी ये निर्लज-क्रूर हरकत,तब और भी ह्रदय कुरेदे है |
जब सत्ता के ठेकेदार कई,सोच तेरी को उम्र-तकाज़ा,, वस्त्रों को जिम्मा कहते हैं |
एक संत-बापू सभी के प्यारे,जिनकी आशा करे राम को लज्जित |
कहता है अगर स्त्री जो माँग ले माफ़ी, तो दया कर छोड़ देंगे वे पापी |
कोई मार तमाचा उनसे पूछे,दोष है क्या स्त्री होना- जो मांगन पड़े माफ़ी |

उनसे भी अव्वल मंत्री उत्तर के प्रदेश से, कहते लड़को से गलती है हो जाती |
कोई कहे उनसे की जा के देखे,पेङों पर कैसे फलों से पहले ? लङकी लटका है दी जाती |
अब बहोत देखा और सुन भी लिया, अपने हम मर्म उनसे क्यों कहें |
जो बेच बैठें हैं अपनी लज्जा, वो इज्ज़त की रक्षा हमारी क्या करें |

अब और कोई निर्भया ना हो, ना और कोई गुङिया ही बन पाए |
वो घूरन की गलती जो करे, एक आवाज़ ही भारी पङ जाए ।
आँखों में आँखें डाल उनहे, एक कङा तमाचा जङ-ये कह दे ।
की सुन ले तू ऐ बलात्कारी, मत कर तू इस पुरुषार्थ की सवारी |

गर जो तूने अब पाँव पसारे, भले ही हों हम कितने भी हारे |
माफ ना होगी तेरी हरकत, पूरी ना होगी तेरी हसरत |
है डर ना तेरा ना खौफ तेरी, शान से घूमेगी बहन-बेटी मेरी |
वादा है मेरा आएगा वो दिन, जब गिरबान पकङ तूझसे ये कहेंगी |
अबतक जो जख्म तूने हैं दिए, मज़बूत हुए हम ना होंठों को सीए ।।

कोई कर्मो से है लज्जित करता,कितनों की सोच गई मारी |
करने वाला है जितना निर्लज,भद्दे सांत्वना दिखाने वाला भी है बलात्कारी ||
By roshan soni