निधि

“”निधि””

कोई नाम नही किसी लङकी का, शब्द नही कोई निधि ,,
इक इठलाता सा रूप बताए , कोई है जो अपनी मर्ज़ी की ।
शब्द सरल कहने को जितना, उतना कठिन मतलब समझाना ,
वो चाहे वो सबको जाने, पर कोई ना अबतक उसको जाना ।।

कोई समस्या, कोई परेशानी , वो जाने हल करने की सारी विधि ।
एक ऐसा नाम मेरे जीवन में, नाम है उसका निधि ।।

अबतक ना मिला, पर जान गया उसमें अलग कोई बात है ,,
नटखट, चंचल, अलबेली सी , छल-कपट से वो अंजान है ।
दिल की सीधी-बिलकुल भोली, बातों से है थोङी ज़िद्दी ,,
नाम नही किसी लङकी का, शब्द नही कोई निधि ।।

हार क्या होती वो ना जाने, बातें करे बिलकुल सीधी ।
एक ऐसा नाम मेरे जीवन में, नाम है उसका निधि ।।
By roshan soni

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