“”””””””दोस्त- जो मैंने पाये”””””

“””””””””दोस्त- जो मैंने पाये”””””
परिभाषा की मोहताज नहीं, शब्द ऐसा है दोस्त ,,
हिंदी में बहोत ज़रूरी, अंग्रेजी में “इम्पोर्टेन्ट मोस्ट” |
कुछ खट्टी-कुछ मीठी यादों का, कुछ राज़ वाली बातों का ,,
जीवन की हर पथ-गाहों पर, मरहम वो बने हर आहों का |

कुछ ऐसे दोस्त-कुछ ऐसे बंधू, जीवन में मैंने भी पाये ,,
कुछ आते ही जाने को आतुर, जो टिके रहे वो प्रिंस, इन्दर,राहुल कहलाये |
कोष शब्द का उठा के मैंने, इन सब का मतलब जो खोजा ,,
ढूंढन से मिल सकते ईश, पर दोस्त कहाँ मैं पाऊँ दूजा |

बैरी-दुश्मन ढूंढन को, एक कोना भी है बहोत बड़ा ,,
मित्र जो जाऊं खानन मैं तो, तीन-लोक भी छोटा पड़ा |
आम बोल में जो मैं बोलूं,दोस्त वही जो हो कमीने ,,
जब नशा उनकी संग का हो,तो क्यों जाएँ मयखाने पीने |

जीवन में बहोत से ऐसे संगी, आएंगे और जायेंगे ,,
संग तेरे हरदम है वही,जो आंसू छुपा तुझ संग मुस्कायेंगे |
भले कभी जो दूर हो जाएँ, या फिर कुछ अनबन हो जाये ,,
याद ये रखना मरते दम तक,तुझ बिन जीवन न चलता था-ना आगे ही चल पाये |

दोस्त वही जो मरकर भी, तुझ बिन जन्नत जाने से कतराएं ,,
ख़ुशी जो संग में नरक की है, बिन संग के जन्नत ठुकराये |
कुछ ऐसे दोस्त मैंने भी पाये, जो प्रिंस ,इन्दर, राहुल कहलाये ||
by roshan soni

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