“” याद- तेरी जो””

“” याद- तेरी जो””

ऐ इश्क़ मेरे, ऐ प्यार मेरे , मैं तुझको भूल न पाउँगा ,
मरते दम तक तू याद रहे , खुदा से ये फरमाउंगा |
याद रहे वो पहला क्षण, जब देख तुझे मैं जग भुला ,
नाम मेरा ज्यों तेरे लव पर आया, मैं खुशी समाँ ना फूला |

याद रहे मुझको वो पल भी, जब देख मुझे घबराती थी ,
तुझे देख-देख जब हँसता था, तू भी मन में मुसकाती थी |
भय था तुझे इस फूहङ जग का, जो अबतक कुछ ना कर पाया ,
जीवान्त जिन्हे एक होने ना दिया, मृतान्त अलग ना कर पाया ।

याद मुझे अब भी वो क्षण , जब छोड़ मुझे तू घर को निकली ,
अबतक जो दिल डरता था इश्क़ से, वो संग तेरे चल निकला पगली ।
पाना तुझको ना चाहता था , पर खोने से मैं डरता था ,
ख्वाब के बहाने ही सही , तुझसे गुफतगू किया करता था ।

जीते जी कुछ ना कर पाया, मरकर बदनाम कर जाऊँगा ,
मर बैठा तेरी एक झलक से, दीदार-पुनः जी पाउँगा ।
शायद अब हम कभी एक ना हो, भ्रमर मैं तुझ कुमुद पर मँडराऊंगा ,
नाम कोई जो ले मेरा- तो कह देना, तुझ बिन आधा कहलाऊंगा ।

मांग तेरी जो भर कोई,नाम तेरा जो पूरा कर दे
फिर भी तुझको ना पायेगा, कोई जाकर ये उससे कह दे
दिल लेकर तू हँस कर चल दी, अब कैसे मैं जी पाऊंगा
ऐ इश्क मेरे, ऐ प्यार मेरे, मैं तुझको भूल ना पाऊंगा ।।

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