हौंसलो के पत्थर

हौंसलो के पत्थर

रोज़ मेरे पाँव की जूती बवाल करती है
मैं कब तक जिंदा रहूंगी ये सवाल करती है
खाली रास्ते को जो मैं दिखाने लगा उसे
ज़ख्म देने शुरू कर दिए, कमाल करती है.

पलके जब मेरी हार पर झिलमिलाने लगे
कदम मेरे चलते चलते लड़खड़ाने लगे
फ़लक तेरे सीने पर जब ज़ख्म होने लगे
समझ लेना मेरे हौंसलो के पत्थर तुझ तक आने लगे.
दानिश मिर्ज़ा

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