जब से पहली बरसात बरसी

जब से पहली बरसात बरसी
तुम से मिलने को मै हर बार तरसी
याद तुम्ही आये इस दिल को
और सपनो की बौछार बरसी

जब से पहली बरसात बरसी

ख्वाब सजाये तुम्हारे
चलोगे एक दिन संग हमारे
दिल को सपनो से मनाया
और अकेले ही हर बार तरसी

जब से पहली बरसात बरसी

बारिश की बूंदो को छु कर
तुमको महसूस किया
और तेरे अनगिनत प्यार में
डुबो के संसार तरसी

जब से पहली बरसात बरसी

तेरे आने के इंतज़ार में
ज़िन्दगी गुज़र रही है
राह तकती कब से मेरी
आँखों की ये श्वेत बद्री

जब से पहली बरसात बरसी
जब से पहली बरसात बरसी

3 Comments

  1. राम केश मिश्र राम केश मिश्र 25/02/2015
  2. Amod Ojha Amod Ojha 27/02/2015
  3. Amod Ojha Amod Ojha 27/02/2015

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