।।गजल।।कातिल तुझे समझा।।

।।गजल।। कातिल तुझे समझा।।

उम्र भर जिंदगी का शाहिल तुझे समझा ।।
शुक्र कर की दोस्त के काबिल तुझे समझा ।। 1।।

थे और भी बेबक तबायफ मुस्कराने को ।।
दर्द औरो का था पर दिल तुझे समझा ।। 2।।

पर तोड़ दी तुमने ही देकर प्यार की खुशबू ।।
ना कि इस दिल ने बोझिल तुझे समझा ।।3।।

लोग करते तय रहे यू जिंदगी का रास्ते ।।।
छोड़कर हर रास्ता मंजिल तुझे समझा ।।4।।

जा किसी दिन याद आये तो न रोना तुम ।।
न कहूगा मैं कभी कातिल तुझे समझा ।। 5।।

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