।।गजल।।इंतजार न था।।

।।गजल।।इंतजार न था।।

प्यार की शौक न थी गम का इंतजार न था ।।
हर किसी को देखा पर क़िसी को प्यार न था ।। 1।।

हर शक्श दूरियों में था बेबसी का मारा ।।।
जबकि उसे तो खुद पर ही एतबार न था ।। 2।।

हर फूल खुशनुमा था बस उम्र भर ही यारो ।।
फिर तो ख़ुशी का उनके कोई आशार न था।। 3।।

हर तरफ बेवफाई हर और बेरुखी थी ।।
हर दिल पड़ा था खाली कोई दिलदार न था ।।

लाख कोशिशे की पर हार कर मैं आया।। दिल एक ही था मेरा पर कोई तैयार न था ।।5।।

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  1. कवि अर्पित कौशिक 21/02/2015

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