श्रद्धांजलि

आनंद का ये आखिरी सफ़र कुछ यूँ कट गया
की आराधना में उनकी हर शीश झुक गया
माना रंगमंच की वो कठपुतली दुनिया से आज हो गई है अलग-अलग
मगर प्रेम उनका सबके दिलो में रहेगा हमेशा अमर
अगर तुम न होते ,आपकी अदाए न होती
कोरा कागज बन के रह जाता ये फ़िल्म जगत
जिंदगी को आखिरी ख़त लिखने वाले ऐ बहारौ के आशिक
स्वर्ग के दो रास्तो में ही गिरेगी तेरी कटी पतंग
न दुश्मन है कोई, न जीवन में कोई दाग
हर बाबु मोशाए को है आपसे अनुराग
आखिर क्यूँ न हो आपकी ख़ामोशी का गम
ऐ छला बाबु….न भूलेंगे कभी आपको आप की कसम
अनुरोध है मेरा न बहाओ आंसू उनके nears एंड dears
क्यूंकि काका कहते थे i hate tears …..

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