एक अनुभव

दीप जलेंगे -तम छटेगा,
मन पे छाए गहरे तम का क्या होगा ?
पल -पल गहराए गा वह और भी !

लौ जलेगी -ज्योति मिलेगी,
बरसों से जलते इस दिल का क्या होगा ?
बिरह पीड़ा में तडप उठे गा और भी !

लोग मिलेंगे -गले लगेंगे,
प्यासी आंखों में आशा का क्या होगा ?
लौटेगी निराश आज वह और भी !

दीप हंसा -लौ भी बोली,
निराश प्रेम हो बैठने से क्या होगा ?
जलते ही रहो, जलना है तुम्हें अभी और भी !

———–बिमल
(बिमला ढिल्लन)

One Response

  1. Navpreet 21/02/2015

Leave a Reply