सुनो मेरे दोस्तों !

सुनो मेरे दोस्तों !

आज और कुछ नही इतना सुनो मेरे दोस्तों !
अपनी खामियों का मत किस्मत को दोष दो !!

वक़्त मिल सकता है जिंदगी बदलने के लिए
जिंदगी होती नही कभी वक़्त बदलने के लिए
रखो होसला खुद पर इतना यकीन कम न हो
डर को अपने, हिम्मत की ताकत से तोड़ दो ……(१)

आज और कुछ नही इतना सुनो मेरे दोस्तों !
अपनी खामियों का मत किस्मत को दोष दो !!

रो- रोकर किसी को कैसे पाया जा सकता है
खोने से किसी को कहां भुलाया जा सकता है
बीते हुए लम्हों में बाकी जिंदगी जाया न कर
आड़े आये खुशियो में ऐसे लम्हों को रोक दो ……(२)

आज और कुछ नही इतना सुनो मेरे दोस्तों !
अपनी खामियों का मत किस्मत को दोष दो !!

तूफ़ान रुलाके तुझे गुजरे जो तेरी राहो से
बिखर न जाना कही हवाओ से घबराकर
जुड़ न जाए तेरे नाम के साथ टूटना तेरा
ऐसी सदाओं का दामन पहले से छोड़ दो ……(3)

आज और कुछ नही इतना सुनो मेरे दोस्तों !
अपनी खामियों का मत किस्मत को दोष दो !!
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डी. के. निवातियाँ