चुनावी मौसम

चुनावी मौसम चल रहा है।
देश पूरा जल रहा है।
हर तरफ महंगाई की मार है,
भ्रष्टाचारियों से जनता परेशान है।

चुनावी मौसम में नेता
जनता से मिलने आते हैं,
जैसे बरसात के मौसम में
मेंढ़क निकल आते हैं।

खत्म होते ही चुनावी मौसम,
बदल जाता है नेताओं का मन।
फिर ये जनता को भूल जाते हैं,
जिनके बहुमूल्य मत को पाकर
ये संसद में जाते हैं।

निशान्त पन्त “निशु”

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