गुल -गुलिस्तां

ऐ गुल -गुलिस्तां तेरे दम से है,
महकता है चमन –
महक यह तेरे दम से है!
अभी मुरझाया क्यों तू,
सुबह की बेला है –
साथी भी हैं तेरे –
अभी ना तू अकेला है –
फिर यह मुरझाया चेहरा
रुलाता क्यूं चमन को ?
क्या माली है भूला –
ना सींचा तुझ को उस ने –
या पवन है भूली –
हिंडोले में झुलाना ?
ना जाने भूल किस की
हंसी तेरी उड़ाए –
चमन तो है परेशान –
ना गुल उस को हंसाए
—–बिमल
(बिमला ढिल्लन)

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