फूल और कांटा

नव कुसुमित ऐ प्रिय पुष्प
सब लोग कहें मुझे ‘इक कांटा’,
तेरी सुन्दर छवि का कलंक
तीखा भद्दा बस इक कांटा!

तेरी सुगन्ध से सुरभित हो
हर एक हाथ जब बढ़ आता,
मैं तेरा रक्षक बनता हूं –
मुझे देख अचानक रुक जाता!

बस दोष ना तू मुझ को देना
चाहे जो भी ये लोग कहें –
मैं तेरी डाली का रक्षक
इक शूल रहूं – तू फूल रहे!

________ बिमल
(बिमला ढिल्लन)

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