कांटे नहीं होते

वोः माली है ,
हर रोज फूलों को ,
चुनकर ले जाता है.
बड़े बाबूओं के बंगलो में ,
बंदनवार की तरह सजाता है.
रजनीगंधा, चंपा , चमेली, गेंदा
सब बंगलो की शोभा बढ़ाते हैं .
उसके देसी फूल ,
विदेशो में भी जाते हैं ,
फिरंगियों के गलियारों की,
शोभा बढ़ाते हैं .
फूलों को देखते ही ,
हर कोई खुश हो जाता है,
कोई हजार तो कोई पांच सौं के ,
नोट उनपर लुटाता है .
हर शाम ,
वोः मुरझाये फूल ,
तबले की थाप पर ,
घुंघरूं को अपनी आवाज बना कर ,
कांच के फर्श पर थिरकते हैं .
नवाबो की हस्ती देखिये ,
उन्हें छूने से भी न डरते हैं .
क्योंकी ,
वोः जानतें है की ,
इन
फूलों में ,
कांटें नहीं होते .———————————– अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. Abhishek Rajhans 13/02/2015
  2. Vikas Bhanti Vikas Bhanti 14/02/2015

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