कर्म करना पड़ेगा

कर्म करना पड़ेगा

सच है की पत्ता नही हिलता बिन कुदरत की मर्जी से
फिर भी फल अगर पाना है तो कर्म करना ही पड़ेगा

देखकर दुनिया के कारनामे हासिल कुछ नही होगा
चाहत अगर कमल पाने की कीचड में धंसना पड़ेगा

ऐसे ही नहीं मिलती किसी को गुलशन की खुसबू
गुलाब को पाने के लिए काँटों से उलझना पड़ेगा

साहिल पे बैठने से कभी दरिया पार नही होता
उस पार जाना है तो लहरो के संग लड़ना पड़ेगा

नित देखो सपने नये नये ख्वाबो से कुछ न होगा
कुछ पाने की चाहत को अंजाम में बदलना पड़ेगा

नहीं मिलता कभी कुछ दुनिया में बस तकदीर भरोसे
मंजिल है पानी तो तुफानो का दामन चीरजाना पड़ेगा

जीवन तो एक नदिया जैसा सुख दुःख दो किनारे है
लय में चलना है तो दोनों के संग संग बहना पड़ेगा

उड़ना परिंदो की तरह, आसमान को छूना बुरा नहीं
याद रहे टिकने के लिए पैरो को जमी पे रखना पड़ेगा

कब तक भटकेगा भ्रम जाल में इंसान अब तो जाग
आगे बढ़ने के लिए अज्ञानता का त्याग करना पड़ेगा

न कर गिला कभी इस मिटटी से औकात बताती है
कोई राजा हो या रंक सबको एक जैसा अपनाती है
सीख सके तो सीख ले जीने का सलीका समुन्द्र से
चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना पड़ेगा !!

डी. के. निवातियाँ ________!!!

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