तुम्हारे लिए

ठंडीमें तुम्हारे श्वासें श्पर्स देना मुझको
इलाजें नफ़रतें सही साथ देना मुझको |

जी हल्का होने तक बदला लेना मुझसे
दुश्मन बनी सही कुछ तो मिला मुझसे |

उड़ाना, आँख मोड़ना सबकुछ करना मुझपे
दिलका रिश्ता ये भी सही ऐसे ही रखना मुझपे |

दूर होनेका दुःख ठुकरानेसे भी बड़ी होती दर्द
जिया तो तुम्हारे लिए तुम ही हो तो ये क्या दर्द |

राम शरण महर्जन
०२/०२/२०१५

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