“बलिदान के बाद”

क्रंदन कर करुणा ने पूछा क्या जीवन है सैनानी का ,
पीछे छोड़ जाते है घर को क्या होगा उन परिवारो का |
तमगे और बलिदान से बढ़कर क्या राष्ट्र को कुछ मिल पायेगा ,
कुछ करना है तो उन परिवारों को सीचों,कुछ क़र्ज़ तो उनका चुक जायेगा ||

—– कवि कौशिक

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