“तुमसे मिलके”

लौट आई है मेरा बिछड़ा यार
छायी है चाहत की खुशबू आज
बैठ के नदी किनारे हम दोनों
याद करेंगे अपने बीती हर बात

चेहरा खिला हुआ होंठो में है मुस्कुराहट
जो मिला है मुझे वर्षो बड़ी दिन बाद
तुमसे मिलके आज ऐसा लग रहा है
हो गया है सारा जीवन मेरा आबाद

कोई गिला न सिकवा है तुमसे
मै खुश हूँ सच में बहुत आज
तुमसे मिल के आज ऐसा लग रहा है
मिल गया है हर जख्म की ईलाज

तू जोबन फूल की कली है
खुशबू बिखेर “दुष्यंत” के गली आज
मुझे पिला दे चाहत की सुधा
लिख दे ज़िन्दगी तू मेरे नाम

उजाला हुआ है ज़िन्दगी तेरे आने से
तू चांदनी बनकर आई है मेरे पास
तू मिली तो तोहफे की क्या जरूरत
गुजारिश है मुझे रखना दिल के पास

बिरहा सहरा ज़िन्दगी मेरे आई हो
भिगोने मुझे बनके सावन की बरसात
मेरे आँगन सदा चाहत बरसते रहना
मेहर होगी दिल की पूरी करना हसरत

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