शौक से

शौक से

चाँद ने पूछा रात में भटकते चकोर से
क्यों तड़पती फिरती दिन और रात में
धीरे जबाब दिया फड़फड़ाती चकोर ने
दूर बैठा तू क्या बताऊ डर लगे शोर से
कभी आकर तो मिल, दो घडी भोर में
कहानी अनंत है वक़्त जीवन में कम है
मिलन का इरादा लिए निकले जोश से
कोई मिल जाए तुम सा दो पल के लिए
हम तो आये थे दुनिया में बस तेरे लिए
किसी तरह अपना ख़्वाब हो जाए पूरा
रख लो गर जो सर अपनी इन बाहो में
हम तो मर जायेंगे फिर बड़े ही शोक से

डी. के. निवातियाँ ______!!!

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