करके तो देखो

करके तो देखो

अंधियारी रातो में सपनो का दीपक जलाकर तो देखो !
जिंदगी बहुत खूबसूरत है, कभी आजमाकर तो देखो !!

कितना अासान हो जाता है, सफर राहे जिंदगी का !
किसी को यादो की कश्ती में कभी बिठाकर तो देखो !!

सब कुछ लगने लगता है इस जहाँ में अपना सा !
किसी संग प्यारा सा संसार कभी बसाकर तो देखो !!

खूबसूरत लगने लगेगी ये जिंदगी खुद- पे – खुद !
नजरो से नफ़रत का चश्मा कभी हटाकर तो देखो !!

कैसे किसी की नजर लग जाए तुम्हारे इस प्यार को !
आँखों में काला कजरा सुरमा कभी सजाकर तो देखो !!

हम कोई अश्रुधारा नही जो इन आँखों से ढलक जाएंगे !
एक बार अपने नयनो का, कभी कैदी बनाकर तो देखो !!

पिंघल सकते है पत्थर भी पानी के बूँद की चोट से !
प्रेम की नमी का समुन्दर, कभी बहाकर तो देखो !!

तक़दीर ढल सकती है बिखरी दुनिया सवर सकती है !
एक बार कुछकर गुजरने का हौसला बनाकर तो देखो !!

मीठी वाणी की पुकार से झुक जाया करते भगवान भी !
एक बार अपना अंदाजे बयां, कभी बदलकर तो देखो !!

कभी न रख पाओगे खुद को तन्हा इस भरी महफ़िल में
किसी को अपनेपन का एहसास कभी दिलाकर तो देखो

डी. के. निवातियाँ ________###

One Response

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 17/09/2017

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