एक कच्ची धागें

शत्रुता क्या होती है
नफ़रत करके तो देखो
रिश्ता क्या होती है
प्यार करके तो देखो
गुनाह क्या होती है
अपने नजर पे गिरके देखो
ये सासें, ये एहसासे सब कुछ
एक कच्ची धागें जैसे
संभाला तो बड़ों से बड़ा
टूटा तो सब से छोटा |

-राम शरण महर्जन
०१/२९/२०१५

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