मछुवारा मृत्यु और प्रेम दोनों ही है

मछुवारा मछली को
अपने आभासी जाल में फँसा लेता है
और उसे उसके जीवन और संसार से
मुक्त कर देता है
मछुवारा मृत्यु और प्रेम दोनों ही है
लेकिन केवल एक भिन्नता है
यदि मछुवारा मृत्यु है
तो मछली केवल एक बार मरती है
और यदि प्रेम है
तो वह प्रतिक्षण मरती है

– नीरज सारंग

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