“””ऐ चाँद”””

“मैने चान्द से पूछा”-~कि अये चान्द किसके लिये तु रातो को जागता है,,,,,आखिर कौन है जिसके लिये इस दिशा से उस दिशा भागता है,,,,,इस दूनिया मे तो लोग तेरा नाम जोड़ते है अपने माशुक के सँग,,,,,और तु ना जाने किसका नाम अलापता है,,,,,”चान्द ने कहा”-कि अये मेरे दोस्त मुझे मेरे हाल पे छोड़ दे,,,,,सो जा और ये अपनी ज़ीद तोड़ दे,,,,,मै तो सदियो से भटक रहा हू इस आँसमा के गलिचो मे,,,,,जिसका है ईन्तज़ार मुझे क्या जाने वो मिल जाये राह के किसी मोड़ पे,,,,,
“””””विकास”””””

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