तुम मेरी मृत्यु नहीं देख सकते

इससे पहले की मै मर ही न जाऊँ
तुम मुझे प्यार नहीं कर सकते
और तुम्हारा प्यार भी; धंधा है तुम्हारा
तुम मसिहाओं की तक दुकान लगाते हो
जब की वे मृतात्मा कुछ नहीं दे सकते तुम्हे
फिर भी तुम उन्हे खरीदते और बेचते हो

न जाने किस गली से गुज़र आते हो
बु आती है तुम्हारी नज़रों से
और नाखुनो से तुम्हारे टपकती है लार
गीधडों की तरह मंडराते हो;
अगर दिखाई दे कोई शिकार; तुम्हारी हवस का
दारू; बीडी; तंबाखु, भी तुच्छ है तुम्हारी इस लत के आगे

और मुँह खुले तो चार टाँके लगते है तुम्हे
तुम एक पल भी जीने के काबील नहीं हो;
बीना चोरी के
अरे, जहां तुम खुद तुम्हारी कमाई नहीं हो
वहां तुम्हारी कमाई कैसी !
और एक कदम भी वापस आने को; खून सूखता है तुम्हारा; पत्थर की तरह;
तभी तो रेंगते रेंगते; आज यहां इतनी रेत दिखायी दे रहीं हैं

तुम ब्रंहांड के सच्चे वारीस हो;
न वह साफ़दिल है, न तुम
और तुम चुनते भी क्या हो; चीत या पट
दोनो एक ही चीज़ !
करवट बदलते बदलते तुम बिस्तर खा गये हो
और तुम तक रहे हो मेरे हाथ पांव;
पर मै भांप गया हूँ; तुम्हारी उपस्थिती
अब मै और नहीं सिंचूंगा तुम्हे
और तुम मेरी मृत्यु भी नहीं देख सकते
तुम मेरी मौत का बस इंतजार कर सकते हो

कवि~डॉ. रविपाल भारशंकर

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