सचमुच की यातना

झूठी राहत
ढूंढ रहा था मैं
पर तूने दे डाली
सचमुच की यातना .. .

खुशियों से
जो ढंक रहे थे मुझे
क्या कम था

क्या फितूर था

कि जिससे शीतलता पाई
चाह रही थी
कि वही
जलाए मुझे …

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