“पाश”

जनवरी२७,२०१५ माघ शुक्ल८, संबत्२०७१
‘मंगल ‘ का घनघोर घटा ,
अब – तब करते बरसात |
आओ सपने सजा-सजा कर,
रख लें ममता की लाज |
चारो तरफ अँधेरा दिखता ,
कही- कहीं पर प्रकाश |
फिर भी आयो दौड़धूप कर,
खेलें हम सब नूतन पाश ||
पाश -आर्य जाती का लड़ने का हथियार ,फंदा|

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  1. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 28/10/2015

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